Page 8 - MS Hindi Patrika
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हमारा लवद्यालर् : ज्ञान का मंलदर
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लवद्यालर् कवल एक भवन नहीं, र्ह वह स्थान है जहा बच्चों क सपनों को पंख लमलते हैं। र्हा लशक्षक दीपक क
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समान है और छाि उसकी लौ है, जो हम अज्ञानता क अंधकार स लनकालकर प्रकाश की तरफ लेकर आते हैं। हमार े
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लवद्यालर् म न कवल संस्कार अनुशासन और रचनात्मकता पर लवशर् बल लदर्ा जाता है बलकक लशक्षा भी सही ढंग
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स दी जाती है। हम संस्कार एम एस एफ एस क माध्र्म स लदए जाते हैं। लजन्हें ग्रहण करक हर छाि को अपने जीवन म ें
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आगे बढने का अवसर लमलता है। र्ही कारण है लक हमारा लवद्यालर् ज्ञान, संस्कृलत और प्रगलत का प्रतीक बन चुका
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है। र्ह कवल ज्ञान का कद्र नहीं बलकक व्र्लित्व लनमायण की प्रर्ोगशाला है,इसललए म अंत म र्ही कह ँगी लक -
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लवद्यालर् मेरा ज्ञान का प्रतीक
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र्ह रहेगा मेर लदल क नजदीक।।
रालश
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जब मन पहली बार मंच पर बोलन का अनुभव लकर्ा
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आज म अपने जीवन क खास लदन को र्ाद कर रहा ह ँ | र्ह वह लदन था जब मने पहली बार मंच पर भार्ण लदर्ा था
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र्ह हमार स्क ूल का सामूलहक भोज था। म बहुत घबरा हुआ था। मर हाथ कांप रहे थ और लदल बहुत तेज धडक रहा
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था। मुझ डर लग रहा था लक म क ुछ भूल ना जाऊ , जैसे ही मेर बोलने की बारी आई मैं धीर-धीर मंच की ओर बढा।
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वहा पहुँचा । मने गहरी सांस ली और बोलना शुऱू कर लदर्ा। शुरुआत म थोडी घबराहट हुई लेलकन लफर मने धीर-धीर े
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आत्मलवश्वास स बोलना शुऱू कर लदर्ा ।जब मरा भार्ण खत्म हुआ तो सभी ने ताललर्ा बजाई। म बहुत खुश था |उस
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लदन मुझ समझ म आर्ा लक अगर हम लहम्मत कर तो कोई भी काम मुलश्कल नहीं होता।
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नक्ष अग्रवाल
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