Page 10 - MS Hindi Patrika
P. 10
ें
लडलजटल र्ुग म पुस्तकों का स्थान
ें
ँ
वतयमान समर् को लडलजटल र्ुग कहा जाता है, जहा हर कार्य म तकनीक की भूलमका अहम हो गई है। लशक्षा का क्षेि
े
भी इसस अछूता नहीं रहा है। आज इंटरनेट, स्माटफोन और लैपटॉप जैसे उपकरणों क माध्र्म से लशक्षा हर छाि की
े
य
ें
पहुँच म आ गई है। लवद्याथी अब ऑनलाइन क्लासज़, र्ूट्र्ूब वीलडर्ो, ई-बुक्स, पीडीएफ फाइलें और ऑलडर्ो बुक्स
े
े
ें
क माध्र्म स लकसी भी लवर्र् पर ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। एक लक्लक पर पूरी लाइब्ररी मोबाइल म उपलधध हो जाती
े
े
है। इसस लशक्षा अलधक सुलभ, सस्ती और तेज़ हुई है। खासकर महामारी क समर् म लडलजटल लशक्षा ने एक बडी
े
े
ें
े
भूलमका लनभाई है, लजसस लाखों छािों की पढाई बालधत नहीं हुई। इन सभी उपललधधर्ों क बावजूद र्ह कहना गलत
े
होगा लक मुलद्रत पुस्तकों का महत्व समाप्त हो गर्ा है।
े
े
पुस्तक कवल जानकारी का स्रोत नहीं, बलकक अनुभव और भावना का साधन भी हैं। जब हम लकसी पुस्तक क पन्ने
ें
पलटते हैं, तो एक अलग ही मानलसक जुडाव होता है। लकताबों स पढते समर् मन की एकाग्रता, ककपनाशलि, और
े
े
लवचारों की गहराई लवकलसत होती है। इसक लवपरीत, लडलजटल पढाई क दौरान मोबाइल नोलटलफकशन, लवज्ञापन और
े
े
स्क्रीन थकान जैसी समस्र्ाएँ ध्र्ान भटका सकती हैं। लकताबों का अपना एक सौंदर्य और आत्मीर्ता होती है, जो
े
े
लकसी लडलजटल उपकरण में नहीं लमलती। इसक अलावा, लंबे समर् तक स्क्रीन देखने स आँखों पर बुरा असर पडता
है, जबलक पुस्तकों क साथ ऐसा नहीं होता। लवद्यालर्ों म भी आज भी परीक्षा की तैर्ारी, पाठ्र्पुस्तकों और संदभय
ें
े
ें
सामग्री का मुख्र् आधार मुलद्रत पुस्तक ही हैं।
र्ह सच है लक लडलजटल तकनीक ने अध्र्र्न क नए द्वार खोले हैं, लेलकन उसका र्ह मतलब नहीं लक पुस्तकों का र्ुग
े
समाप्त हो गर्ा है। वास्तव में, हमें आज की लशक्षा प्रणाली में लडलजटल संसाधनों और पारंपररक पुस्तकों क बीच
े
संतुलन बनाना सीखना होगा। लडलजटल माध्र्म तेज़ और सुलवधाजनक हो सकते हैं, लेलकन पुस्तकों की गहराई,
स्थालर्त्व और आलत्मक शांलत का कोई लवककप नहीं हो सकता। इसललए आज की पीढी को चालहए लक वे तकनीक
का सही उपर्ोग कर, लेलकन साथ ही पुस्तकों स भी जुडाव बनाए रखें, क्र्ोंलक एक अच्छी लकताब कवल ज्ञान नहीं
े
े
ें
ें
देती, बलकक जीवन का दृलिकोण भी बदल सकती है। लडलजटल र्ुग म पुस्तकों का स्थान कम नहीं हुआ है — वह अब
भी उतना ही महत्वपूणय, स्थार्ी और प्रेरणादार्क है, लजतना वह पहले था।
ऋलि
X अ

