Page 13 - MS Hindi Patrika
P. 13
लशक्षा में असमानता और फीस का बोझ
े
ै
ें
े
े
ें
भारत जस लवकासशील देश म लशक्षा सभी क ललए समान ऱूप स सुलभ नहीं है। समाज म आलथक, सामालजक और
य
ें
क्षेिीर् असमानताओं क कारण लशक्षा व्र्वस्था म भी गहरा अंतर देखा जाता है। एक ओर प्राइवेट स्क ूलों म ें
े
अत्र्ाधुलनक सुलवधाए हैं, तो दूसरी ओर सरकारी स्क ूलों म बुलनर्ादी सुलवधाओं की भी कमी है।
ँ
ें
महंगे लनजी स्क ूलों और कॉलेजों की बढती फीस मध्र्म और लनम्न वगय क पररवारों पर भारी बोझ बन चुकी है। उच्च
े
े
े
लशक्षा तो कई छािों क ललए एक सपना बनकर रह जाती है। र्ह असमानता न कवल प्रलतभा को दबाती है, बलकक
समाज में सामालजक और आलथयक खाई को भी बढाती है।
े
लशक्षा को एक मौललक अलधकार क ऱूप म सुलनलित करने क ललए सरकार को फीस लनर्ंिण, स्कॉलरलशप र्ोजनाएँ,
ें
े
े
और सरकारी संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने जस कदम उठाने चालहए। जब हर बच्चा लबना भेदभाव क लशक्षा पाएगा,
े
ै
तभी सच्चे अथों म देश का लवकास संभव होगा।
ें
लदव्र्ांशु
X अ
अत्र्लधक पाठ्र्क्रम और परीक्षा का दबाव
ें
वतयमान लशक्षा प्रणाली म छािों पर अत्र्लधक पाठ्र्क्रम और परीक्षा का भारी दबाव देखने को लमलता है। स्क ूलों म ें
लकताबों का बोझ, लंबे पाठ्र्क्रम और बार-बार होने वाली परीक्षाएँ बच्चों क मानलसक व शारीररक स्वास््र् पर
े
नकारात्मक प्रभाव डालती हैं।
बच्चों स कवल अच्छ अंक लाने की अपेक्षा की जाती है, लजससे वे रचनात्मकता, खेल-क ूद और अन्र् कौशलों स े
े
े
े
दूर हो जाते हैं। परीक्षा को सफलता का एकमाि मापदंड मानना भी छािों म तनाव, भर् और आत्मलवश्वास की कमी
ें
पैदा करता है।
इस समस्र्ा का समाधान र्ह है लक पाठ्र्क्रम को संलक्षप्त, व्र्ावहाररक और रोचक बनार्ा जाए। मूकर्ांकन प्रणाली म ें
भी बदलाव लाकर लनरंतर मूकर्ांकन, प्रोजेक्ट आधाररत सीख और मानलसक स्वास््र् पर ध्र्ान देना चालहए।
ें
य
जब लशक्षा बोझ नहीं बलकक आनंददार्क अनुभव बनेगी, तभी लवद्याथी अपने संपूण लवकास की ओर अग्रसर हो सकगे।
आलश्वन आजाद
X अ

