Page 7 - MS Hindi Patrika
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लखडकी से लटकती बल
                                                                         े

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                 स्क ूल क कमर की लखडकी स बाहर एक छोटी सी बेल लटकी रहती है। वह न कवल हरी-भरी और सुंदर है, बलकक
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                                                                        े
                                                                                े
                 उसक जीवन में लछपी एक बडी सीख भी है। र्ह बेल पतली-सी डाली स मजबूती स लटकी रहती है, चाहे तेज़ हवा
                                                                                  ें
                 चले र्ा भारी बाररश हो। र्ह हम लसखाती है लक जीवन म लकतनी भी मुलश्कलें आएं, हम मजबूत बने रहना चालहए।
                                                           ें
                                         ें
                 जब सूरज तेज़ होता है, तब भी वह बेल अपनी पलत्तर्ों को चमकाती है, धूप म झुलसने क बजार् अपनी छार्ा फलाती
                                                                          ें
                                                                                  े
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                 है। बरसात में भीगने क बाद वह और भी हरी-भरी लदखती है, जैसे कह रही हो — “मुलश्कलों म भी जीवन का रंग बना
                 रहता है।”



                 र्ह बेल लदन-रात लखडकी पर लटकी रहती है, लबना लशकार्त क, लबना थक। उसकी हर पत्ती म संघर् की एक कहानी
                                                                         े
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                              य
                 छुपी है — संघर् जो उस टूटने नहीं देता। बच्चों की लकलकाररर्ा, हवा की सरसराहट, और बदलते मौसम — सबक
                                                                                                       े
                 बीच भी वह अपनी जगह मजबूती स कार्म रहती है।
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                                               ें
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                 र्ह बेल हम र्ह लसखाती है लक जीवन म चाहे लकतनी भी कलठनाइर्ा आएं, हमें धैर्य और आशा से काम लेना चालहए।
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                 अगर हम बेल की तरह मजबूती स जकड रहें, तो हर तूफान क बाद हम और भी हर-भर और सुंदर बन सकते हैं।
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                                                                                         (घूमी)
                                                                                    लवद्याथी संपालदका
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