Page 2 - MS Hindi Patrika
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प्रधानाचार्य जी की लखनी से ...!
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                 र्ह मर ललए अत्र्ंत हर्  य
                 और गौरव का लवर्र् है
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                 लक  लवद्यालर्  क  लहंदी
                 एवं संस्कृत लवभाग की
                 वालर्यक      पलिका

                 ‘पररदृश्र्’  का र्ह नवीन
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                 संस्करण आपक समक्ष
                 प्रस्तुत लकर्ा जा रहा है।

                 र्ह  पलिका  लवद्यालर्
                 पररवार  की  बौलिक,

                 रचनात्मक एवं

                                                             े
                 सांस्कृलतक अलभव्र्लिर्ों का एक सशि मंच है, जो न कवल लवद्यालथयर्ों की प्रलतभा को उजागर करती है, अलपतु
                 हमार शैक्षलणक पररवेश की गररमा को भी दशायती है।
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                 लशक्षा का उद्देश्र् कवल पाठ्र्क्रम का अध्र्र्न र्ा परीक्षा म अच्छ अंक प्राप्त करना नहीं है, अलपतु इसका वास्तलवक
                                                                   े
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                 उद्देश्र् व्र्लि क सवागीण लवकास को सुलनलित करना है;  लजसम लचंतनशीलता, नैलतकता, सामालजक उत्तरदालर्त्व
                                                                                            ँ
                                                                              ें
                 और सृजनशीलता का समावेश हो। हमारा र्ह लवश्वास रहा है लक प्रत्र्ेक बालक म अपार संभावनाए लनलहत होती हैं,
                 और जब उन्हें उलचत लदशा, प्ररणा एवं मंच प्रदान लकर्ा जाए, तो वे असाधारण उपललधधर्ाँ प्राप्त कर सकते हैं।
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                 ‘पररदृश्र्’  उसी लवश्वास की पररणलत है- र्ह उन भावनाओं, लवचारों और अनुभवों का संग्रहीत स्वऱूप है, जो लवद्यालथयर्ों
                                                                               े
                 ने लेख, कलवता, लचि, लनबंध, संस्मरण, एवं अन्र् माध्र्मों स व्र्ि लकए हैं। र्ह न कवल उनकी सालहलत्र्क रुलच और
                                                              े
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                 भार्ागत कौशल का पररचार्क है, बलकक र्ह उनक मनोभावों, समाज क प्रलत दृलिकोण और जीवन-दृलि को भी
                 प्रलतलबंलबत करता है।
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                 इस सृजनात्मक प्रर्ास म लवद्यालथर्ों का मागयदशन करने वाले समस्त लशक्षकों तथा संपादकीर् सलमलत क प्रलत म हृदर्
                                                    ै
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                 स कृतज्ञता प्रकट करता ह ँ। उनका पररश्रम, धर्य और मागयदशन प्रशंसनीर् है। साथ ही, मैं उन अलभभावकों का भी
                                                                य
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                 आभार व्र्ि करता ह ँ, जो सदैव लवद्यालर् क उद्देश्र्ों म सहभागी बनकर बच्चों क उज्जज्जवल भलवष्र् हेतु सहार्क रहे
                                                           ें
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                 मुझ पूण लवश्वास है लक ‘पररदृश्र्’  का र्ह अंक न कवल पठनीर्ता की दृलि स श्रेष्ठ लसि होगा, अलपतु र्ह लवद्यालथर्ों
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                 को नवीन सोच, सकारात्मक ऊजा एवं रचनात्मक लदशा प्रदान करगा।
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                 ईश्वर से प्राथयना है लक हमारा लवद्यालर् सदैव ज्ञान, संस्कार और मानवता क मूकर्ों का पोर्क बना रहे तथा हमार  े
                                                                          े
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                 लवद्याथी देश और समाज क सशि स्तंभ क ऱूप म लवकलसत हों।
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                 इन्हीं शुभकामनाओं क साथ,
                                                                                      (एस श्रीराम)
                                                                                      प्रधानाचार्य
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