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मेरा बस्ता, मेरा साथी
म एक छोटा बच्चा ह ँ। मरी आँखों म सपने हैं, मन म लजज्ञासा है और हृदर् म प्रम है। म इस दुलनर्ा को अपनी मासूम
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नज़रों स देखता ह ँ, जहा हर चीज़ मुझ नई और रोचक लगती है। मुझ लखलौनों स खेलना अच्छा लगता है, पर मैं कभी-
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कभी उन बातों को भी महसूस करता ह ँ, लजन्हें बड लोग शार्द न समझ पाएं।
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जब मा मुझ प्र्ार स थपलकर्ा देती हैं, तो मुझ लगता है लक म दुलनर्ा का सबस सुरलक्षत बच्चा ह ँ। जब लपता जी मुझ े
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गोद में उठाते हैं, तो मुझ लगता है लक म बहुत ऊचा उड रहा ह ँ। मर ललए प्र्ार का मतलब लसफ लमठाइर्ा र्ा उपहार
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नहीं हैं, बलकक वह मुस्कान है जो मा-पापा क चेहर पर होती है।
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मुझ अच्छा लगता है जब कोई मरी बात ध्र्ान स सुनता है। मुझ दुख होता है जब कोई मरी भावनाओं को नज़रअंदाज़
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करता है र्ह सोचकर लक म लसफ एक बच्चा ह ँ। मुझ भी तकलीफ़ होती है, मुझ भी चोट लगती है — लसफ घुटनों पर
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नहीं, मन पर भी।
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जब कोई डाँटता है र्ा लझडकता है, तो म चुप हो जाता ह ँ — पर मरा मन बहुत क ुछ कहता है। कभी सोचता ह ँ लक क्र्ा
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म अच्छा नहीं ह ँ? क्र्ा मेरी बातें ज़ऱूरी नहीं हैं? लफर जब मा प्र्ार से समझाती हैं, तो मन लफर स मुस्क ुरा उठता है।
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मुझ खेलना पसंद है, काग़ज़ पर रंग भरना अच्छा लगता है, पर जब कोई मरी ड्राइंग को लबना देखे फक देता है, तो मन
उदास हो जाता है। म चाहता ह ँ लक मरी छोटी-छोटी कोलशशों को सराहा जाए। म चाहता ह ँ लक मुझ समर् लदर्ा जाए,
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मुझ समझा जाए।
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मैं जब बडा हो जाऊगा, तो इन भावनाओं को भूल जाऊगा र्ा शार्द नहीं। पर आज, इस पल में, मैं लसफ र्ह चाहता
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ह ँ लक मुझ प्र्ार लमले, मेरा आदर हो, और मुझ वह समझ लमले लजसकी मुझ सच म आवश्र्कता है।
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क्र्ोंलक म कवल एक बच्चा नहीं ह ँ,
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मैं भी एक लदल, एक आत्मा और एक सपना ह ँ।
पोलनस डबास
VII ब

