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स्क ू ल की आलखरी घंटी का एहसास



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                            ँ
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                                े
                 घडी की सुइर्ा जस ही 01 बजकर 25 लमनट पर पहुँचती हैं, हर छाि की नज़र दरवाज़े से ज़्र्ादा अब घडी की ओर
                 लटकी होती हैं। सभी को पता होता है लक अब कवल 35 लमनट और — लफर बजेगी स्क ू ल की आलखरी घंटी।
                                                    े

                 कक्षा में लशक्षक पढा रहे होते हैं, पर बच्चों का मन अब पंलछर्ों की तरह उडान भरने लगता है। क ुछ छाि चुपक स  े
                                                                                                   े

                 लकताबें बंद करने लगते हैं, क ुछ बैग म सामान जमाने लगते हैं, और क ुछ तो सोच म डूबे रहते हैं —
                                                                               ें
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                 "आज की छुट्टी क बाद क्र्ा खेलेंगे?"


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                 और लफर जैसे ही 02:00 बजे — पूर लवद्यालर् म गूंजती है एक जानी-पहचानी आवाज़:
                                            े
                 टन-टन-टन!


                 र्ह होती है — स्क ू ल की आलखरी घंटी।



                                                                                           य
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                                                            ें
                 र्ह घंटी लकसी संगीत स कम नहीं लगती। उस एक क्षण म जस पूरी कक्षा म जान आ जाती है। क ुलसर्ा लखसकती हैं,
                                                              ै
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                 ज़मीन पर पड पाँव लफर से हलचल में आ जाते हैं, और बच्चों क चेहरों पर एक अलग ही चमक लदखाई देती है। ऐसा
                                                                 े
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                 लगता है जस लपंजर म बंद पंछी अब उडने को तैर्ार हैं।
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                 पर क्र्ा आलखरी घंटी कवल छुट्टी का संकत है?
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                                   े
                 नहीं।
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                 र्ह घंटी लसफ लवद्यालर् क एक लदन क अंत की सूचना नहीं देती, बलकक कई भावनाओं क दरवाज़ खोल देती है।
                                                                                    े
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                 कभी-कभी र्ह घंटी सुक ू न देती है — जस गलणत की कलठन परीक्षा क बाद लमला लवश्राम। कभी र्ह घंटी उदासी से
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                 भर देती है — जस लकसी लप्रर् लशक्षक की लवदाई वाले लदन। और कभी र्ह घंटी उत्साह का लवस्फोट कर देती है —
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                 जस ग्रीष्मावकाश की शुरुआत हो।
                 पर सबसे गहरी बात तब होती है — जब र्ह स्क ू ल जीवन की अंलतम घंटी बन जाती है।



                 वह लदन क ुछ अलग ही होता है।


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                 कक्षा म शांलत होती है, पर लदलों में हलचल।
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