Page 17 - MS Hindi Patrika
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गुरुजी को नमन
लकताबों से जो ररश्ता जोडा,
हर सवाल का हल समझार्ा।
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अंधर म थ जब हम कभी,
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ज्ञान का दीपक तुमने जलार्ा।
हर डाट म छुपी थी ममता,
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हर सीख में जीवन का सार।
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तुम्हार शधदों की गहराई म,
छुपा था अनुभव अपार।
चलना लसखार्ा अपने पैरों पर,
सपनों को आकार लदर्ा।
हम बन सक जो आज क ुछ,
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उसम तुम्हारा उपकार ललर्ा।
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नमन तुम्हें हे ज्ञान क दीपक,
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तुम हो हमार पथ क रक्षक।
शधद नहीं हैं काफी मेर,
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कह सक ू तुमको "धन्र्वाद लशक्षक"।
चाऱू
VII ब

