Page 16 - MS Hindi Patrika
P. 16
द मान स्क ू ल : उन्नलत की ओर
लवद्यालर् हमारा प्र्ारा
ज्ञान का सागर, उलजर्ारा
जहां हर लदन सीख लमलती है
नई उमंग, नर्ा लसललसला चलता है।
े
शुरुआत हुई एक छत क नीचे
अब इमारतें खडी है बडी-बडी
कक्षा में अब स्माट बोड है ,
य
य
लशक्षा में नर्ापन का जोड है ।
नवीन र्ंिों का आलोक र्हां
लचंतन की लनत नई धारा बहाए
े
क ं प्र्ूटर स संवाद करता मन
सृजनात्मकता को लक्षलतज तक पहुंचाए।
लशक्षक न कवल पाठ पढाते
े
े
संस्कारों की लौ एम एस एफ एस क माध्र्म से जगाते।
लववेक, करुणा और लवज्ञान का मेल
गढते हैं चररि, लवचारों में खेल।
े
मेरा लवद्यालर् अब कवल भवन नहीं
र्ह चेतना का प्रवाह है ।
ें
हर ई ं ट म स्वप्न अंलकत है ,
हर दीवार पर लवश्वास की राह है ।
संग प्रर्ोगशाला की दीवार ें
ककपनाओं को आकार देती है
और पुस्तकालर् की शांलत म ें
सभ्र्ताओं की पुकार रहती है ।
मेरा लवद्यालर् मेरा गौरव, र्ह मेरी पहचान
लवश्व पटल पर सदा रहे इसका नाम।
ें
अंत म म र्ही कह ंगा-
ैं
एक लदव्र् प्रकाश का
लदव्र् हाथों हुआ पदापयण है।
ज्जर्ोत से ज्जर्ोत सजी
सज गर्ा लवद्यालर् का प्रांगण है
े
े
लझललमल लसतार सार करते
आपको वंदन हैं।
इस लशक्षा महल की नींव
े
रखने वाले महापुरुर् को मरा शत-शत अलभनंदन है।
ऋलिमान
X ब

