Page 25 - MS Hindi Patrika
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लकताबों से ज़्र्ादा नज़र दोस्तों पर लटकी होती हैं।
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शधदों से ज़्र्ादा भाव आँखों में होते हैं।
और जब वह अंलतम घंटी बजती है —
हम उठते हैं,
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धीर-धीर बैग उठाते हैं,
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एक बार पीछ मुडकर अपनी कक्षा को देखते हैं,
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और लफर धीर-धीर स्क ूल की सीलढर्ा पार करते हैं...
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जस कोई सपना पीछ छूट रहा हो।
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उस आलखरी घंटी क साथ ही बीते वर्ों की स्मृलतर्ा एक-एक कर मन क आँगन में उतरने लगती हैं —
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पहली बार स्क ू ल का र्ूलनफॉम पहनना,
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पहली बार धलैकबोड पर ललखा अपना नाम,
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वह पहला पुरस्कार, वह पहली सजा,
और वह पहली दोस्ती — जो लज़ंदगी भर क ललए बन गई।
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स्क ू ल की आलखरी घंटी कवल घडी की एक सूचना नहीं होती —
वह एक र्ुग का अंत होती है,
और साथ ही एक नए सफ़र की शुरुआत।
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वह घंटी हम र्ह लसखाती है लक —
हर शुरुआत का एक अंत होता है,
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और हर अंत म छुपा होता है एक नर्ा मागय, एक नई लदशा, एक नई पहचान।
धान्र्ा लिपाठी
III ब

