Page 6 - Hindi Magazine
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आपक हाथों में ‘पररदृश्र्’ का र्ह नवीन अंक कवल कुछ पृसॎठों का संकलन नहीं है,
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बलकक हमार लवद्यालर् क लवद्यालथयर्ों की रचनात्मकता, ककपनािीलता और
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अलभव्र्लि का सुंदर प्रलतलबंब है। इस पलिका क माध्र्म स लवद्यालथयर्ों ने अपने
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लवचारों, अनुभवों और भावनाओं को िब्दों म ढालने का प्रर्ास लकर्ा है।
आज का समर् लवज्ञान और प्रौद्योलगकी का समर् है। लडलजटल माध्र्मों और कृलिम
बुलिमिा क इस र्ुग म भी भार्ा और सालहत्र् का महत्व कम नहीं हुआ है। सालहत्र्
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हम संवदनिील बनाता है, सोचने की दृलष्ट देता है और हम अपनी संस्कृलत तथा
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मूकर्ों स जोड़ रखता है। लहंदी कवल संवाद का माध्र्म नहीं, बलकक हमारी सांस्कृलतक
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पहचान और भावनाओं की सिि अलभव्र्लि है।
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‘पररदृश्र्’ क इस अंक म कलवताए, लघुकथाए, लेख, संस्मरण तथा अन्र् लवलवध रचनाए सलम्मललत हैं। प्रत्र्ेक रचना अपने
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आप म एक अलग अनुभव और एक नई दृलष्ट प्रस्तुत करती है। इन रचनाओं क माध्र्म स हमार लवद्यालथयर्ों की ककपना, लजज्ञासा
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और सृजनिीलता स्पष्ट ऱूप स लदखाई देती है।
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म अपने सभी सहपालठर्ों का हृदर् स आभार व्र्ि करती ह ँ, लजन्होंने अपनी रचनाओं और सहर्ोग स इस पलिका को समृि
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बनार्ा। हमार मागदिक लिक्षकों क प्रलत भी हम सभी कृतज्ञ हैं, लजनक मागदिन और प्रोत्साहन क लबना र्ह प्रर्ास संभव नहीं
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हो पाता। लवद्यालर् प्रिासन और प्रधानाचार्य महोदर् क लनरंतर सहर्ोग क ललए भी हम हृदर् स धन्र्वाद देत हैं।
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आिा है लक ‘पररदृश्र्’ का र्ह अंक आपको अवश्र् पसंद आएगा। आपक सुझाव और प्रलतलिर्ाए हमार ललए सदैव प्रेरणा का
स्रोत रहेंगी और भलवष्ट्र् में हमें और बेहतर प्रर्ास करने क ललए उत्सालहत करगी।
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सादर
छाि संपालदका

