Page 4 - Hindi Magazine
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प्रधानाध्र्ालपका जी का संदेि ...!
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पररदृश्र्’ क इस नवीन अंक क माध्र्म
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स आप सभी स जुड़त हुए मुझ अत्र्ंत
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हर् और संतोर् की अनुभूलत हो रही है।
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र्ह पलिका हमार लवद्यालथयर्ों की
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ककपनािीलता, लजज्ञासा,
संवेदनिीलता और सृजनात्मक
अलभव्र्लि का सुंदर प्रलतलबंब है। प्रत्र्ेक
रचना बालमन की सहजता, मौललकता
और सीखने की उत्सुकता को स्वर
प्रदान करती है। प्राथलमक लिक्षा बच्चे
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क जीवन की वह आधारलिला है, लजस
पर उसक व्र्लित्व, लवचारों और
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भलवष्ट्र् की लदिा लनधायररत होती है। इस अवस्था म हमारा उद्देश्र् कवल पुस्तकीर् ज्ञान प्रदान करना नहीं, बलकक बच्चों में
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लजज्ञासा, आत्मलवश्वास, करुणा, सहर्ोग, अनुिासन और प्रकृलत एवं समाज क प्रलत संवेदनिीलता जैसे जीवन-मूकर्ों का
लवकास करना भी है। हमारा लवश्वास है लक सीखना तभी साथयक है, जब वह बच्चे को बेहतर समझने, बेहतर सोचने और बेहतर
मनुष्ट्र् बनने की प्रेरणा दे।
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आज लिक्षा लनरंतर नए आर्ामों को आत्मसात कर रही है। ऐस समर् म बच्चों को कवल उिर र्ाद करवाने क स्थान पर प्रश्न
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पूछने, अपनी बात रखने, अनुभवों स सीखने और नए लवचारों को साकार करने क अवसर देना आवश्र्क है। द मान स्कू ल क
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प्राथलमक खंड म हमारा प्रर्ास है लक प्रत्र्ेक बच्चा स्वर्ं को सुरलक्षत, सम्मालनत और प्रोत्सालहत अनुभव कर तथा अपनी लवलिष्ट
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क्षमताओं क अनुऱूप आग बढ़ सक।
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‘पररदृश्र्’ इसी िलक्षक दृलष्टकोण की एक रचनात्मक अलभव्र्लि है। इसम संकललत कलवताए, कहालनर्ाँ, लेख, लचि एवं अन्र्
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रचनाए हमार लवद्यालथयर्ों की ककपना की उड़ान और उनक अनुभवों की लवलवधता को सामने लाती हैं। इन रचनाओं म बालमन
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की लनश्छलता क साथ-साथ सीखने, समझने और अपने आसपास की दुलनर्ा को नए दृलष्टकोण स देखने की अद्भुत क्षमता
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लदखाई देती है।
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म अपने सभी लवद्यालथयर्ों को उनकी रचनात्मक सहभालगता और उत्साह क ललए हालदयक बधाई देती ह ँ। साथ ही, लिलक्षकाओं,
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संपादकीर् दल तथा अलभभावकों क प्रलत उनक लनरंतर मागदिन, सहर्ोग और लवश्वास क ललए हृदर् से आभार व्र्ि करती
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ह ँ। लवद्यालर् और पररवार क बीच सिि सहभालगता ही बच्चों क सवाांगीण लवकास को एक नई लदिा प्रदान करती है।
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मुझ लवश्वास है लक ‘पररदृश्र्’ का र्ह अंक नन्हे मनों की ककपनाओं को पंख देगा, उनकी अलभव्र्लि को मंच प्रदान करगा और
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पाठकों को भी बालमन की सुंदर दुलनर्ा स पररलचत कराएगा। र्ह पलिका हमार लवद्यालथयर्ों को सीखने, सृजन करने, संवेदनिील
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बनने और लनरंतर आगे बढ़ने क ललए प्रेररत करती रहे-र्ही मेरी हालदयक कामना है।
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इन्हीं िुभकामनाओं क साथ, ‘पररदृश्र्’ क इस नवीन अंक क सफल प्रकािन हेतु हालदयक बधाई एवं िुभकामनाएँ..!
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सदैव सीखने, सृजन और संवेदनिीलता की भावना क साथ,
(डॉ लनलध दीवान)
प्रधानाध्र्ालपका प्राथलमक लवद्यालर्

