Page 73 - MS Magazine 2025
P. 73

िश क - एक पथ  दशक


                                                                                             े
                                                                                  े
           िश क एक     क जीवन म ब त ही मह पण              लोग काफी सौभा शाली होत ह, िज  अ  िश क िमलत     े

                             े
                                                    ू



            ू

                                                                                       ं
                                                                           ु

                                                                                                े
                                                    ु
                                                                                                        ै
           भिमका िनभात ह। एक िश क एक मागदशक, ग ,          ह। एक िश क का म  ल  छा ो को  ान दना होता ह।
                       े

                                                                        े
                                                                      े
                    े
                                     ू
                  े

                                                                          े
                                                े
                                          ँ
                                                                                                     ै
                                                                                                ं
           िम  होन क साथ ही और कई भिमकाए िनभात ह। जो      िकताबी  ान दन क अलावा एक िश क ब ो को नितक
                                                                 े
           हमार जीवन म हमार िलए मददगार सािबत होत ह। व  े   ान भी दत ह।

               े
                                                 े
                                                                   े

                            े

                                                       कोिशका,
                                                      VI स, 6126
                                                           मा  ँ
                                                    ँ
            े

                                                         ँ
           मरी हर बात का त   ाल ह,          गर, म रोऊ तो हसाना भी जानती हो।  मरा हौसला बढ़ाती हो।
                         ु
                                                 ै
                                  ै
                                                                            े

                                                            ू
                                  ै
                                                      े
            ै
              े
                                                   ु
                                              े
           कस हो बटा बस यही सवाल ह?          ह मा! तम  म की मित हो,        ह मा! मझम िव ास जगाती हो
                                                ँ
                  े
                                                                               ँ

                                                                                 ु
                                                                            े

                                             े
                                                    ँ
           ह मा! तरा  ार सच म बिमसाल ह।      म ही बाटा करती हो।            और सब जानती हो।
                              े
            े
                 े
                                     ै
               ँ
           हर म  ल आसान बनाती हो,            थम ग , िम  हो,                मरी मा बहद खबसरत और आकषक ह।
                                                  ु
               ु
                                                                                 ँ
                                                                                  े

                                                                                          ू
                                                                                       ू

                                                                            े
                                              े

           हर हालात म लड़ना िसखाती हो।       मरी श   पह चानती हो,           वह दिनया म मरी सबस अ ी मागदशक ह।

                                                                                       े



                                                                                             े
                                                                               ु
                                            हार मत,                        मा! आपकी ममता, अनमोल और आशीवाद
                                                                             ँ

            े

           ह मा! तम हर हाल म जीना िसखाती हो।  उठ संघष  कर                  सव   ह।
               ँ
                 ु

                                                                               े
                                                                                  ै
                            े

                   ू
                   ँ
           गर, म  ठ तो  ार स मनाती हो,
                                               कदय राणा, VIII स, 6122
                                                ृ

                                                                       ै
                                              पड़ हम लगाना ह...!
                                                े
                                                                               ै
                                                                  े
                                                       ू
                             ै
                                                            े
                  ँ
           धरती मा को बचाना ह,                        दषण स बचान का यही  ोत ह।

            े
           पड़ हम लगाना ह।                            जीवन हमारा इन पर िनभर ह, ै

                         ै

                                                        े
                         ु
                                                                                    ै
           जीवन म अगर खशहाली लानी ह, ै               आन वाली पीढ़ी को भी यही िसखाना ह।।
           तो चारो ओर ह रयाली बनानी ह।।              अगर सख  ा  पाना ह,   ै
                                                           ु
                                    ै
           फल, स  या, छाया, औषिध दत पड़ ह,            तो पड़ हम लगाना ह।।
                                       े
                                                                     ै

                                     े
                                                        े
                      ँ
                                    े
                                               यशवीर मान, III अ, 6889
                                            एक नई दिनया की ओर
                                                          ु
                     ै
                            ू
           आज जो भी ह वो सब छटा जा रहा ह, ै                शरारतो और गलितयो पर हम अब कहा जाएगा,
                                                                  ं
                                                                             ं

           अभी जो पल ह वो हर पल बीता जा रहा ह।             िक बड़ हो गए हो तम।
                                                                          ु
                                          ै
                      ै
                                                                 े
                                             े


                                                                                           ु
                                                                                               ू
           सारी याद, वो सारी बात; एक-एक कर सामन आ रही ह,    वो बचपन, वो टॉफी वो नई िकताबो की खशब,
                                                                                       ं
                         े
                                                                          े
                   ु
                                                                                 े
                                               े

                                    ु
                                                     ै
           बस अब कछ ही दर म एक नई दिनया द क़ द रही ह।।      वो नई पिसल या पन खरीदन की खशी,
                                                                                      ु

                                         ँ
                       ू
              ँ
                   ु
           यहा की खशब, यहा की हलचल, यहा की हर चीज मझ    े  आखो म वो हर पल नज़र आएगा।

                           ँ
                                                                ं
                                                      ु
                                                              ँ
                          ै
                                                                      ु
                                                                     ँ
                                                                         ं
                                                                          े
           अलिवदा कह रही ह, शायद अब हम ना िमल,             और तब आसओ क साथ हर ल ा
                  े
                                  ु
           और िमल भी तो शायद ब त कछ बदल जाएगा।             िक ा बन जाएगा,
                                                                    ँ
           िफर वह एहसास अपनपन का अधरा-सा रह जाएगा,         वो हमारी हसी का िह ा बन जाएगा।
                             े
                                      ू
           िफर कभी हम शायद झगड़ नही पाएग,                   और िफर एहसास होगा िक िकतना व  बीत गया ह, ै
                                         े
                                    ं
                                       ँ
                                ँ
                                 े
                  े
                       ँ
           एक दसर की हसी भल जाएग।।                         िकतना कछ पीछ छट गया ह।।
                                                                   ु
                                                                                  ै
                                                                           ू
                           ू
               ू
                                                                         े
               ू
                                 ँ
                                         ं
                  े
                                               ँ
           एक दसर का िनवाला हम बाट कर नही खा पाएग, े
                                                       ं

                                               शौय शािड , X स, 5089
                                                                                                         XII
                                                                                                         XI XI XI  XII XII I I I
                                                                                                        X X X
                                                                                                        IX IX IX  IV IV IV V V V IIII IIII IIII III III III II II II
                                                                                                         VIII  VIII  VIII
                                                                                                         VII  VII  VII
                                                         Page No. 70                     The Mapsian 2025
   68   69   70   71   72   73   74   75   76   77   78