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िश क - एक पथ दशक
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िश क एक क जीवन म ब त ही मह पण लोग काफी सौभा शाली होत ह, िज अ िश क िमलत े
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भिमका िनभात ह। एक िश क एक मागदशक, ग , ह। एक िश क का म ल छा ो को ान दना होता ह।
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िम होन क साथ ही और कई भिमकाए िनभात ह। जो िकताबी ान दन क अलावा एक िश क ब ो को नितक
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हमार जीवन म हमार िलए मददगार सािबत होत ह। व े ान भी दत ह।
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कोिशका,
VI स, 6126
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मरी हर बात का त ाल ह, गर, म रोऊ तो हसाना भी जानती हो। मरा हौसला बढ़ाती हो।
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कस हो बटा बस यही सवाल ह? ह मा! तम म की मित हो, ह मा! मझम िव ास जगाती हो
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ह मा! तरा ार सच म बिमसाल ह। म ही बाटा करती हो। और सब जानती हो।
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हर म ल आसान बनाती हो, थम ग , िम हो, मरी मा बहद खबसरत और आकषक ह।
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हर हालात म लड़ना िसखाती हो। मरी श पह चानती हो, वह दिनया म मरी सबस अ ी मागदशक ह।
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हार मत, मा! आपकी ममता, अनमोल और आशीवाद
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ह मा! तम हर हाल म जीना िसखाती हो। उठ संघष कर सव ह।
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गर, म ठ तो ार स मनाती हो,
कदय राणा, VIII स, 6122
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पड़ हम लगाना ह...!
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धरती मा को बचाना ह, दषण स बचान का यही ोत ह।
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पड़ हम लगाना ह। जीवन हमारा इन पर िनभर ह, ै
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जीवन म अगर खशहाली लानी ह, ै आन वाली पीढ़ी को भी यही िसखाना ह।।
तो चारो ओर ह रयाली बनानी ह।। अगर सख ा पाना ह, ै
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फल, स या, छाया, औषिध दत पड़ ह, तो पड़ हम लगाना ह।।
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यशवीर मान, III अ, 6889
एक नई दिनया की ओर
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आज जो भी ह वो सब छटा जा रहा ह, ै शरारतो और गलितयो पर हम अब कहा जाएगा,
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अभी जो पल ह वो हर पल बीता जा रहा ह। िक बड़ हो गए हो तम।
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सारी याद, वो सारी बात; एक-एक कर सामन आ रही ह, वो बचपन, वो टॉफी वो नई िकताबो की खशब,
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बस अब कछ ही दर म एक नई दिनया द क़ द रही ह।। वो नई पिसल या पन खरीदन की खशी,
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यहा की खशब, यहा की हलचल, यहा की हर चीज मझ े आखो म वो हर पल नज़र आएगा।
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अलिवदा कह रही ह, शायद अब हम ना िमल, और तब आसओ क साथ हर ल ा
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और िमल भी तो शायद ब त कछ बदल जाएगा। िक ा बन जाएगा,
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िफर वह एहसास अपनपन का अधरा-सा रह जाएगा, वो हमारी हसी का िह ा बन जाएगा।
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िफर कभी हम शायद झगड़ नही पाएग, और िफर एहसास होगा िक िकतना व बीत गया ह, ै
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एक दसर की हसी भल जाएग।। िकतना कछ पीछ छट गया ह।।
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एक दसर का िनवाला हम बाट कर नही खा पाएग, े
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शौय शािड , X स, 5089
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XI XI XI XII XII I I I
X X X
IX IX IX IV IV IV V V V IIII IIII IIII III III III II II II
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